एक किसान की जिंदगी खेतों में
फसलों के बीच निकल जाती है,
दिन रात पसीना बहाते हैं तब
बीजों से अंकुर निकल आते है,
ये किसान ही पूरी दुनिया का
पेट पालने वाले है,
कुछ लोग है जो किसानों को
मिट्टी का कीड़ा तक कह जाते हैं,
शायद भूल गए हैं जो
अनाज वो घर में खाते हैं,
इन किसानों ने ही अपने
खून से सींच कर उगाया है,
ना हो अगर किसान दुनिया में
सब भूखे ही मर जायेंगे,
ना होगी बीजों की उत्पत्ति
ना रोटी हम खा पाएंगे,
ना खा पाएंगे कोई सब्जी हम
ना कोई फल हमें मिल पाएंगे,
बन जायेंगे फिर नर भक्षी सब
एक दूजे की मार खायेंगे,
ना मिला सम्मान किसानों को
जिनके वो हकदार हैं,
फिर भी सबका पेट भरे हैं
वो ईश्वर सा महान है,
ऐसी किसान की जिंदगी
जिनकी मिट्टी में बसी जान है,
वो भी छीने जा रहे उनके लिए
जो कार्य विष के समान है,
किसान है की फिर भी
उन सबके लिए कुर्बान है,
किसान है उपजाऊ मिट्टी है
तो दुनिया ये समाज है,
एक किसान की जिंदगी
हीरे से भी मूल्यवान है।




0 Comments:
Post a Comment
Thank you for comments.