अपनी लिखी हर कविता को सहेज रखूंगा,
तू समझे मेरे जज्बातों को वो नब्ज लिखूंगा,
मेरे कलम की है जो लिखावट वो जुबान से ना बोलूंगा,
गर ना हो तेरे दिल में मेरी चाहत तो ये राज़ ना खोलूंगा।
प्यार करती हो तो प्यार जताओ तो जानूं, मेरी खुशी के खातिर सब कुछ लुटाओ टू जानूं, बिन कहे दिल की बात समझ जाओ तो जानूं, ये जिस्मों से रिझाना ...