मरते हजारों में हैं
गिनतियां बस हजार में होते हैं,
ये बेदर्द दुनियां है जनाब
यहां बिन गुस्ताखी ही हमजैसों को
गहरे जख्म दिए जाते हैं।
मरते हजारों में हैं
गिनतियां बस हजार में होते हैं,
ये बेदर्द दुनियां है जनाब
यहां बिन गुस्ताखी ही हमजैसों को
गहरे जख्म दिए जाते हैं।
हिलते हो लड़खड़ाते हो,
कभी इधर तो कभी उधर मंडराते हो,
उधर की बातें इधर और,
इधर की बातें उधर करते हो,
हमने तो सुई सी भी तकलीफ नहीं दी,
ये तू अच्छे से जानती है,
फिर भी क्या अच्छा बदनाम किया तुमने,
जैसे सौ कातिलों सा बरताओ किया हो हमने।
प्यार करती हो तो प्यार जताओ तो जानूं, मेरी खुशी के खातिर सब कुछ लुटाओ टू जानूं, बिन कहे दिल की बात समझ जाओ तो जानूं, ये जिस्मों से रिझाना ...