मोहब्बत का जैसे था बुखार हुआ उन्हें,
बस दो चार दिन बात मुलाक़ात किया हमनें,
बात यही नहीं शादी तक पहुंचाई उसने,
फिर जाने क्यों नफ़रत के काबिल बना दिया हमें।
प्यार करती हो तो प्यार जताओ तो जानूं, मेरी खुशी के खातिर सब कुछ लुटाओ टू जानूं, बिन कहे दिल की बात समझ जाओ तो जानूं, ये जिस्मों से रिझाना ...