पतले पतले नाजुक होंठ ये तेरे
जैसे गुलाब की हो पंखुड़ी
इनमें इतनी लजीज मिठास है
जैसे हो चासनी से अभी निकली।
प्यार करती हो तो प्यार जताओ तो जानूं, मेरी खुशी के खातिर सब कुछ लुटाओ टू जानूं, बिन कहे दिल की बात समझ जाओ तो जानूं, ये जिस्मों से रिझाना ...
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