हिलते हो लड़खड़ाते हो,
कभी इधर तो कभी उधर मंडराते हो,
उधर की बातें इधर और,
इधर की बातें उधर करते हो,
हमने तो सुई सी भी तकलीफ नहीं दी,
ये तू अच्छे से जानती है,
फिर भी क्या अच्छा बदनाम किया तुमने,
जैसे सौ कातिलों सा बरताओ किया हो हमने।
Friday, November 5, 2021
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